दो - इन्द्र्याणि च संयम्य



 इन्द्र्याणि च संयम्य बक्वत्पंडितो नरः।
देशकालबलं ज्ञात्वा सर्व कार्याणि साधयेत्।।

(चाणक्यनीति)

                   बगुले की भाँति इन्द्रियों को वश में करके, 

देश काल एवं बल को जानकर 

                   विद्वानों को अपना कार्य सफल करना चाहिए।

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