Monday, September 21, 2015

कस्मै देवाय हविषा विधेम

हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत् 
स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम ।
य आत्मदा बलदा यस्य विश्व उपासते प्रशिषं यस्य देवाः 
यस्य छायामृतम् यस्य मृत्युः कस्मै देवाय हविषा विधेम ।
 
यः प्राणतो निमिषतो महित्वै क इद्राजा जगतो बभूव             
यः ईशे अस्य द्विपदश्चतुष्पदः कस्मै देवाय हविषा विधेम । 
यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसय सहाहुः             
यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम । 
येन द्यौरुग्रा पृथिवी च दृळहा येन स्वः स्तभितं येन नाकः         
यो अंतरिक्षे रजसो विमानः कस्मै देवाय हविषा विधेम ।
 
यं क्रन्दसी अवसा तस्तभाने अभ्यैक्षेतां मनसा रेजमाने           
यन्नाधि सूर उदतो विभाति कस्मै देवाय हविषा विधेम ।
आपेा ह यद् वृहतीर्विश्वमायन् गर्भं दधाना जनयन्तीरग्निम           
ततो देवानाम् समवर्ततासुरेकः कस्मै देवाय हविषा विधेम ।
यश्चिदापो महिना पर्यपश्यद् दक्षं दधाना जनयन्तीर्यज्ञम्         
यो देवेष्वधि देवः एक आसीत कस्मै देवाय हविषा विधेम ।
मा नो हिंसीज्जनिताः यः पृथिव्या यो वा दिव सत्यधर्मा जजान             
यश्चापश्चन्द्रा बृहतीर्जजान कस्मै देवाय हविषा विधेम ।
 
प्रजापते न त्वदेतान्यन्यो विश्वा जातानि परि ता बभूव           
यत् कामास्ते जुहुमस्तन्नो अस्तु कस्मै देवाय हविषा विधेम ।
 हिरण्यगर्भ-ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 121

Sunday, August 2, 2015

आया सावन बरसा पानी




दिन रात व्योम में उड़-उड़ कर
फिर मोह में शायद थोडा पड़ कर
बेचैन हुए काले बादल
अम्बर तजकर भागे पागल
उनसे फिर छलका पानी।
आया सावन बरसा पानी।।

धरती की थी आँखे उदास
प्यासी थी उसकी साँस-साँस
नभ उसके दुःख से दुखित हुआ
बादल सा काजल द्रवित हुआ
आँसू बनकर बहका पानी।
आया सावन बरसा पानी।।

धरती से जब से अलग हुआ
निस्तेज हुआ निष्प्राण हुआ
पूरी कर निष्ठुर कठिन सजा
सूरज की कैद से छूट भगा
बरसा प्रेम का तरसा पानी।
आया सावन बरसा पानी।।

स्थिर को गति देने आया
नवजीवन ये बोने आया
आशाओं-उम्मीदों का प्रतीक
पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतीक
सर्जन करने निकला पानी।
आया सावन बरसा पानी।।

Sunday, July 12, 2015

घर की याद - भवानी प्रसाद मिश्र

आज पानी गिर रहा है,
बहुत पानी गिर रहा है,
रात भर गिरता रहा है,
प्राण मन घिरता रहा है,

अब सवेरा हो गया है,
कब सवेरा हो गया है,
ठीक से मैंने न जाना,
बहुत सोकर सिर्फ माना-

क्योंकि बादल की अँधेरी,
है अभी तक भी घनेरी,
अभी तक चुपचाप है सब,
रातवाली छाप है सब,

गिर रहा पानी झरा-झर,
हिल रहे पत्ते हरा-हर,
बह रही है हवा सर-सर,
काँपते हैं प्राण थर-थर,

बहुत पानी गिर रहा है,
घर नजर में तिर रहा है,
घर कि मुझसे दूर है जो,
घर खुशी का पूर है जो,

घर कि घर में चार भाई,
मायके में बहिन आई,
बहिन आई बाप के घर,
हाय रे परिताप के घर!

आज का दिन दिन नहीं है,
क्योंकि इसका छिन नहीं है,
एक छिन सौ बरस है रे,
हाय कैसा तरस है रे,

घर कि घर में सब जुड़े है,
सब कि इतने कब जुड़े हैं,
चार भाई चार बहिनें,
भुजा भाई प्यार बहिनें,

और माँ‍ बिन-पढ़ी मेरी,
दुःख में वह गढ़ी मेरी
माँ कि जिसकी गोद में सिर,
रख लिया तो दुख नहीं फिर,

माँ कि जिसकी स्नेह-धारा,
का यहाँ तक भी पसारा,
उसे लिखना नहीं आता,
जो कि उसका पत्र पाता।

और पानी गिर रहा है,
घर चतुर्दिक घिर रहा है,
पिताजी भोले बहादुर,
वज्र-भुज नवनीत-सा उर,

पिताजी जिनको बुढ़ापा,
एक क्षण भी नहीं व्यापा,
जो अभी भी दौड़ जाएँ,
जो अभी भी खिल-खिलाएँ,

मौत के आगे न हिचकें,
शेर के आगे न बिचकें,
बोल में बादल गरजता,
काम में झंझा लरजता,

आज गीता पाठ करके,
दंड दो सौ साठ करके,
खूब मुगदर हिला लेकर,
मूठ उनकी मिला लेकर,

जब कि नीचे आए होंगे,
नैन जल से छाए होंगे,
हाय, पानी गिर रहा है,
घर नजर में तिर रहा है,

चार भाई चार बहिनें,
भुजा भाई प्यार बहिनें,
खेलते या खड़े होंगे,
नजर उनको पड़े होंगे।

पिताजी जिनको बुढ़ापा,
एक क्षण भी नहीं व्यापा,
रो पड़े होंगे बराबर,
पाँचवे का नाम लेकर,

पाँचवाँ हूँ मैं अभागा,
जिसे सोने पर सुहागा,
पिता जी कहते रहें है,
प्यार में बहते रहे हैं,

आज उनके स्वर्ण बेटे,
लगे होंगे उन्हें हेटे,
क्योंकि मैं उन पर सुहागा
बँधा बैठा हूँ अभागा,

और माँ ने कहा होगा,
दुःख कितना बहा होगा,
आँख में किस लिए पानी,
वहाँ अच्छा है भवानी,

वह तुम्हारा मन समझ कर,
और अपनापन समझ कर,
गया है सो ठीक ही है,
यह तुम्हारी लीक ही है,

पाँव जो पीछे हटाता,
कोख को मेरी लजाता,
इस तरह होओ न कच्चे,
रो पड़ेंगे और बच्चे,

पिताजी ने कहा होगा,
हाय, कितना सहा होगा,
कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ,
धीर मैं खोता, कहाँ हूँ,

गिर रहा है आज पानी,
याद आता है भवानी,
उसे थी बरसात प्यारी,
रात-दिन की झड़ी झारी,

खुले सिर नंगे बदन वह,
घूमता-फिरता मगन वह,
बड़े बाड़े में कि जाता,
बीज लौकी का लगाता,

तुझे बतलाता कि बेला
ने फलानी फूल झेला,
तू कि उसके साथ जाती,
आज इससे याद आती,

मैं न रोऊँगा,कहा होगा,
और फिर पानी बहा होगा,
दृश्य उसके बद का रे,
पाँचवें की याद का रे,

भाई पागल, बहिन पागल,
और अम्मा ठीक बादल,
और भौजी और सरला,
सहज पानी, सहज तरला,

शर्म से रो भी न पाएँ,
खूब भीतर छटपटाएँ,
आज ऐसा कुछ हुआ होगा,
आज सबका मन चुआ होगा।

अभी पानी थम गया है,
मन निहायत नम गया है,
एक से बादल जमे हैं,
गगन-भर फैले रमे हैं,

ढेर है उनका, न फाँकें,
जो कि किरणें झुकें-झाँकें,
लग रहे हैं वे मुझे यों,
माँ कि आँगन लीप दे ज्यों,

गगन-आँगन की लुनाई,
दिशा के मन में समाई,
दश-दिशा चुपचाप है रे,
स्वस्थ की छाप है रे,

झाड़ आँखें बंद करके,
साँस सुस्थिर मंद करके,
हिले बिन चुपके खड़े हैं,
क्षितिज पर जैसे जड़े हैं,

एक पंछी बोलता है,
घाव उर के खोलता है,
आदमी के उर बिचारे,
किस लिए इतनी तृषा रे,

तू जरा-सा दुःख कितना,
सह सकेगा क्या कि इतना,
और इस पर बस नहीं है,
बस बिना कुछ रस नहीं है,

हवा आई उड़ चला तू,
लहर आई मुड़ चला तू,
लगा झटका टूट बैठा,
गिरा नीचे फूट बैठा,

तू कि प्रिय से दूर होकर,
बह चला रे पूर होकर,
दुःख भर क्या पास तेरे,
अश्रु सिंचित हास तेरे!

पिताजी का वेश मुझको,
दे रहा है क्लेश मुझको,
देह एक पहाड़ जैसे,
मन की बाड़ का झाड़ जैसे,

एक पत्ता टूट जाए,
बस कि धारा फूट जाए,
एक हल्की चोट लग ले,
दूध की नद्दी उमग ले,

एक टहनी कम न होले,
कम कहाँ कि खम न होले,
ध्यान कितना फिक्र कितनी,
डाल जितनी जड़ें उतनी!

इस तरह क हाल उनका,
इस तरह का खयाल उनका,
हवा उनको धीर देना,
यह नहीं जी चीर देना,

हे सजीले हरे सावन,
हे कि मेरे पुण्य पावन,
तुम बरस लो वे न बरसें,
पाँचवे को वे न तरसें,

मैं मजे में हूँ सही है,
घर नहीं हूँ बस यही है,
किंतु यह बस बड़ा बस है,
इसी बस से सब विरस है,

किंतु उनसे यह न कहना,
उन्हें देते धीर रहना,
उन्हें कहना लिख रहा हूँ,
उन्हें कहना पढ़ रहा हूँ,

काम करता हूँ कि कहना,
नाम करता हूँ कि कहना,
चाहते है लोग, कहना,
मत करो कुछ शोक कहना,

और कहना मस्त हूँ मैं,
कातने में व्यस्‍त हूँ मैं,
वजन सत्तर सेर मेरा,
और भोजन ढेर मेरा,

कूदता हूँ, खेलता हूँ,
दुख डट कर झेलता हूँ,
और कहना मस्त हूँ मैं,
यों न कहना अस्त हूँ मैं,

हाय रे, ऐसा न कहना,
है कि जो वैसा न कहना,
कह न देना जागता हूँ,
आदमी से भागता हूँ,

कह न देना मौन हूँ मैं,
खुद न समझूँ कौन हूँ मैं,
देखना कुछ बक न देना,
उन्हें कोई शक न देना,

हे सजीले हरे सावन,
हे कि मेरे पुण्य पावन,
तुम बरस लो वे न बरसे,
पाँचवें को वे न तरसें।

Saturday, July 11, 2015

Hanumat Dham

Hanumat Dham is situated on the bank of khannaut river in Shahjahanpur. A large statue of Lord Hanuman is installed in khannaut river.

Thursday, June 25, 2015

People's Budget

Delhi's Aam Admi Party's Government has presented it's first Budget in Delhi Assembly today.
Government has proposed to double the expenditure for education sector.

Following are the highlights of AAP govt's  Rs. 41129 crore budget.

* Pilot project for swaraj budget in 11 constituencies with each constituency getting Rs 20 crore.

* Every district to get a Delhi District Urban Development Agency for micro-management of issues.

* E- governance and m-governance to be promoted.

* Rs 50 crore set aside for free Wi-Fi in all private colleges.

* Rs 9,836 crore for education. Out of a total 1,011 schools 50 schools to be developed as model schools.

* Special training programmes for teachers as well as exchange programmes.

* 20,000 new teachers to be appointed and to make teachers more accountable, CCTV cameras will be installed in all classrooms in government schools.

* Government school playgrounds to be made available to children from colonies. If private schools don't work with transparency, strict action will be taken against them.

* Amendment to be made to make private schools more accountable. Planning a 'skill university' to make Delhi into a knowledge and skill hub.

* Diploma courses will be started in each government polytechnic college and the number of seats to be increased by 100.

* Rs 4,787 crore has been allocated for health. 1,000 neighborhood clinics to be opened, out of which 500 will be completed this year, Rs 125 crore has been allocated for this.

* Proposal to have integrated fare for public transport, study for the same is on.

* Rs 5,085 crore have been allocated for transport. By the end of 2016, 1,380 low-floor buses, 500 mini buses and 1,000 cluster buses will be brought in, 1,200 new bus shelters to come up in the city.

* For women's safety, CCTVs in all cluster and DTC buses will be installed. Hostels for working women to be set up.

* Rs 927 crore set aside for social welfare schemes. Families of police, home guard, civil defense personnel who die in line of duty will be given Rs 1 crore by the government.
Though I am not supporter of AAP and it's way of dealing and presenting several issues, I have always a fascination for idea of self rule through micro democratic organizations. A government which looks after education system seriously is a government which is really able to understand the idea of governance.

Thursday, June 18, 2015

मोदी जी (ललित) और मोदी जी (प्रधानमंत्री)


ये फ़ितना आदमी की ख़ानावीरानी को क्या कम है

हुये तुम दोस्त जिसके दुश्मन उसका आसमां क्यों हो

ये लाइनें अब मोदी जी (ललित) के लिए उनके दोस्तों की जुबान पर होगा आजकल। पहले सुषमा स्वराज फिर वसुंधरा राजे । वहाँ मोदी जी वैकेशन पे वैकेशन  मारे जा रहे हैं । उनकी जिंदगी एक लंबी छुट्टी की तरह है। सैर कर दुनिया की गाफिल ज़िंदगानी फिर कहाँ ।
छुट्टियों के अपने अलग अंदाज हैं। पत्नी का इलाज हो तो एक देश में, इंटरव्यू देना हो तो दूसरे देश में । किसी पुराने दोस्त से मिलना हो तो किसी और देश में , बदनाम होना हो तो किसी और देश में । सोते किसी और देश में होंगे उठते किसी और देश में । बाथरूम किसी देश में जाते होंगे तो चाय किसी देश में ।
सच्चे अर्थों में अंतर्राष्ट्रीय नागरिक !
लगता है हमारे मोदी  जी (प्रधानमंत्री)ने मोदी जी(ललित) से काफी कुछ सीखा होगा । वैसे भी मोदी मोदी से नहीं सीखेगा तो क्या वाजपेयी से सीखेगा?
मोदी जी (प्रधानमंत्री) भी तो सच्चे अंतराष्ट्रीय नागरिक लगते हैं । उनके पाँव ही नहीं आँख, नाक, कान, उंगलिया (ट्वीट करने के लिए ) और मोबाइल सीमा के बाहर ही रहते हैं।
दूरदृष्टि वाले नेता हैं सीमा के अंदर  दिखाई ही नहीं देता
देश को एक और प्रधानमंत्री चुन लेना चाहिए था । मोदी जी (प्रधानमंत्री) देश के बाहर के प्रधानमंत्री होते और दूसरा वाला देश के अंदर का प्रधानमंत्री होता।
दोनों मोदियों (प्रधानमंत्री और ललित ) की विवादों में काफी रुचि है। कभी कभी ऐसा लगता है कि विवाद न हों तो इन बेचारों के जीवन में होगा क्या। बेचारे मोदी जी (ललित) को लोगबाग भूल चुके थे ये विवाद ही तो थे जो उन्हे वापस ले आए लाईमलाइट में। अपने मोदी जी (प्रधानमंत्री) जी भी गुजरात के मुख्यमंत्री कैसे बनते अगर गुजरात भूकंप में केशुभाई की छीछालेदार न होती।
लोग तो यह भी कहते हैं कि उनके मुख्यमंत्री बने रहने में गोधरा कांड, फर्जी(अब असली) एंकाउंटरों ,राज्यबदर सहयोगियों का भी हाथ रहा है ।
अब देखिये न समय समय पर होने वाले विवाद लोगों को याद दिलाते रहते हैं कि कैसे देश के कुछ नासमझ (कोई 69%) कैसे मोदी जी (प्रधानमंत्री) को अभी भी पसंद नहीं करते ।
खैर हमे पता है कि मोदी जी (ललित) इस मुद्दे पर चाहे जितना बोल लें पर मोदी जी (प्रधानमंत्री) बिलकुल नहीं बोलेंगे ।
खैर छोड़िए आपलोग राहुल गांधी पर चुट्कुले बनाइये ।

Sugarcan Field

Sugar cane field
Photo by roushan
place shahjahanpur

Sugarcane is main crop not only in Shahjahanpur district but also in Uttar Pradesh . It requires large amount of water. boring pipe can be spotted in the picture.

Lake Hut in Chuka Spot


Chuka Spot is situated in District Pilibhit in UP. The spot along with forest range has been declared as new Tiger Safari by UP Government. The Spot is situated on Sharda Sagar Dam.

Tuesday, February 3, 2015

Payment Bank Rush


Reliance, Birla join the payment bank rush
 Some of India’s top business houses such as Reliance Industries Ltd (RIL) and Aditya Birla Group are among about 100 entities that have applied for payment and small bank licences, the application deadline for which ended on Monday.
Many in the fray are not so well known
A number of relatively unknown companies have thrown in their hats for taking the niche banking licence. Most of these players already have some presence in the microfinance segment or service distribution.
Profits up, but asset quality still a concern for private banks
 While the October-December period was good for private banks in terms of profitability, asset quality issues plagued the sector severely, with many of them reporting a rise in NPAs. India’s largest private lender, ICICI Bank, for instance, reported gross NPAs of Rs. 13,083 crore (3.40%) in Q3FY15, up 25.8% y-o-y.
India to run current account deficit for foreseeable future: RBI Governor
An article by Reserve Bank of India Governor, released on Monday, says that he sees India running a current account deficit in the foreseeable future, needing net foreign financing. Governor's forecast comes a day before the central bank's bi-monthly monetary policy review, due on Tuesday.
December core output at 3-month low of 2.4%
Annual growth in production of the eight key infrastructure industries declined to a three-month low of 2.4 per cent in December, compared with 6.7 per cent the previous month and four per cent in December 2013. RBI might consider the slow rate of output growth ahead of its monetary policy review on Tuesday.
Jan Dhan costs banks capex of Rs 2,000 cr
Banks have so far made capital expenditure (capex) of around Rs 2,000 crore for opening accounts under PMJDY, Mr. T M Bhasin, chairman, IBA, said. He, also MD of Indian Bank, added: "Opening one account incurs a cost of Rs 140, against the estimation of Rs 80 per account."
India can achieve target of 90% of citizens having access to banking services by 2034, says PwC
Branchless banking solutions could be a smarter choice for enabling scale, said a report —The Future of India: The Winning Leap — by PwC. As a result, India could expand the percentage of citizens who have access to formal banking services (and actively using those services) from 35% in 2012-2013 to 70% in 2024 and 90% in 2034 through investments of $28 billion, much lower than what needs to be spent using traditional methods.
Bank of Maharashtra to reduce exposure to corporate loans

 BOM is planning to scale down the share of corporate loans to 60% of the total credit portfolio during the current financial year from the 70% level. The bank wants to lower its exposure because these loans are less profitable as the corporate sector has a bargaining capacity to negotiate the interest rates to its advantage, according to bank executive director Mr. R Athmaram.